शकुनेः पुत्रेण सह आश्वमेधाश्वविषयः संघर्षः — Arjuna’s restrained engagement with Śakuni’s son during the horse-escort
त॑ निवृत्तं तु शुश्राव चारेणैव युधिष्ठिर: । श्र॒त्वार्जुन॑ कुशलिनं स च हृष्टमना5भवत्
उसी समय युधिष्ठिर ने एक गुप्तचर से सुना कि घोड़ा लौट आया है और अर्जुन भी सकुशल हैं। यह सुनकर धर्मराज का मन अत्यन्त प्रसन्न हो उठा।
वैशम्पायन उवाच