Aśvamedha-dīkṣā, Vyāsa’s horse-release, and Arjuna’s departure with Gāṇḍīva (आश्वमेधिक-दीक्षा तथा हय-उत्सर्गः)
अश्वश्लोत्सृज्यतामद्य पृथ्व्यामथ यथाक्रमम् । सुगुप्तं चरतां चापि यथाशास्त्रं यथाविधि
“आज शास्त्रीय विधि के अनुसार यज्ञ-सम्बन्धी अश्व को क्रमशः सारी पृथ्वी पर विचरण के लिए छोड़ देना चाहिए और ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से यथाशास्त्र विचर सके।”
वैशम्पायन उवाच