Abhimanyu’s Śrāddha; Vyāsa’s Assurance of the Unborn Heir (अभिमन्योः श्राद्धं तथा गर्भरक्षणोपदेशः)
आर्ये क््व दारका: सर्वे द्रष्टमिच्छामि तानहम् । “उस वीरके मारे जानेपर मेरी यह बहिन सुभद्रा दुःखसे आतुर हो पुत्रके पास जाकर कुररीकी भाँति विलाप करने लगी और द्रौपदीके पास जाकर दुःखमग्न हो पूछने लगी --'आर्ये! सब बच्चे कहाँ हैं? मैं उन सबको देखना चाहती हूँ!
“आर्ये! सब बच्चे कहाँ हैं? मैं उन सबको देखना चाहती हूँ।” उस वीर के मारे जाने का समाचार पाकर मेरी बहिन सुभद्रा दुःख से व्याकुल होकर पुत्र के पास गई और कुररी की भाँति विलाप करने लगी; फिर द्रौपदी के पास जाकर शोकमग्न हो पूछने लगी—“आर्ये! सब बच्चे कहाँ हैं? मैं उन सबको देखना चाहती हूँ।”
वैशम्पायन उवाच