Marutta Seeks a Priest: Bṛhaspati’s Refusal and Nārada’s Guidance to Saṃvarta
Chapter 6
मरुत्त उवाच पित्र्यमस्मि तव क्षेत्र बहु मन््ये च ते भृशम् तवास्मि याज्यतां प्राप्तो भजमानं भजस्व माम्
मरुत्त बोले—“विप्रवर! मैं आपके पितामह के समय से ही आपके कुल का यजमान रहा हूँ और आपको अत्यन्त मान देता हूँ। मैं आपकी शरण में आया हूँ; अतः कृपा करके मुझे स्वीकार कीजिये।”
मरुत्त उवाच