Kṛṣṇasya Dvārakā-praveśaḥ — Krishna’s Return to Dvārakā and the Raivataka Festival
वैशम्पायन उवाच यदा स नाशकत् तस्य निश्चयं कर्तुमन्यथा । वज्रपाणिस्तदा दण्डं वज्रास्त्रेण युयोज ह
वैशम्पायन बोले—जब वज्रपाणि इन्द्र किसी प्रकार उत्तंक के निश्चय को अन्यथा न कर सके, तब उन्होंने उसके दण्ड के अग्रभाग में अपने वज्रास्त्र का संयोग कर दिया।
वैशम्पायन उवाच