Kṛṣṇa’s Departure, Auspicious Omens, and the Opening of the Uttaṅka Dialogue (कृष्णप्रयाण-निमित्त-उत्तङ्कसंवाद-प्रारम्भः)
रथे सुभद्रामधिरोप्य भाविनीं युधिष्ठिरस्पानुमते जनार्दन: । पितृष्वसुश्चापि तथा महाभुजो विनिर्ययौ पौरजनाभिसंवृत:
राजा युधिष्ठिर की अनुमति से भाविनी सुभद्रा को भी रथ पर बिठाकर, महाबाहु जनार्दन अपनी पितृस्वसा कुन्ती के साथ, पुरवासियों से घिरे हुए नगर से बाहर निकले।
युधिषछ्िर उवाच