Brahmā’s Instruction on Brahmacarya, Vānaprastha, and the Aliṅga Path
Ethics of Non-attachment
श्रद्धापूतानि भुज्जीत निमित्तानि च वर्जयेत् । सुधावृत्तिरसक्तश्न सर्वभूतैरसंविदम्
वायु ने कहा—श्रद्धा से प्राप्त, पवित्र अन्न का ही आहार करे और मन में कोई निमित्त (छल-योजना) न रखे। सबके साथ अमृत-सा मधुर व्यवहार करे; कहीं भी आसक्त न हो; और किसी भी प्राणी से अनावश्यक परिचय न बढ़ाए।
वायुदेव उवाच