Brahma-vidyā: Satya–Tapas and the Enumeration of Tattvas
Arjuna–Vāsudeva framed dialogue
भगवन्तं प्रपन्नो5हं नि:श्रेयसपरायण: । याचे त्वां शिरसा विप्र यद् ब्रूयां ब्रूहि तन्मम
bhagavantaṃ prapanno ’haṃ niḥśreyasaparāyaṇaḥ | yāce tvāṃ śirasā vipra yad brūyāṃ brūhi tan mama ||
मैं भगवन्! आपकी शरण में आया हूँ और निःश्रेयस को ही लक्ष्य मानता हूँ। हे विप्र! मैं सिर झुकाकर आपसे याचना करता हूँ—जो कुछ मैं पूछूँ, उसका उत्तर मुझे दीजिए।
वायुदेव उवाच