अम्बरीषगाथा—गुणत्रयविभागः तथा लोभनिग्रहः
Ambarīṣa’s Gāthā: The Guṇas and the Restraint of Greed
लोभाद्धि जायते तृष्णा ततत्रिन्ता प्रवर्तते । स लिप्यमानो लभते भूयिष्ठं राजसान् गुणान् । तदवाप्तौ तु लभते भूयिष्ठं तमसान् गुणान्
लोभ से तृष्णा उत्पन्न होती है और तृष्णा से चिन्ता प्रवृत्त होती है। लोभ में लिप्त मनुष्य पहले बहुत-से राजस गुणों को प्राप्त करता है; और उनकी प्राप्ति हो जाने पर उसमें तामस गुण अधिक मात्रा में आ जाते हैं।
ब्राह्मण उवाच