Dehānta (Cyavana) and Upapatti: Kāśyapa’s Questions and the Siddha’s Account of Death, Pain, and Karmic Re-embodiment
ब्राह्मण उवाच एवं संचोदित: सिद्ध: प्रश्नांस्तान् प्रत्यभाषत । आनुपूर्व्येण वाष्णेय तनन््मे निगदत: शृणु
ब्राह्मण बोले—वृष्णिनन्दन श्रीकृष्ण! काश्यप के इस प्रकार पूछने पर सिद्ध महात्मा ने उन प्रश्नों का क्रमशः उत्तर देना आरम्भ किया। मैं वही कहता हूँ—सुनिए।
ब्राह्मण उवाच