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Shloka 5

Dehānta (Cyavana) and Upapatti: Kāśyapa’s Questions and the Siddha’s Account of Death, Pain, and Karmic Re-embodiment

ब्राह्मण उवाच एवं संचोदित: सिद्ध: प्रश्नांस्तान्‌ प्रत्यभाषत । आनुपूर्व्येण वाष्णेय तनन्‍्मे निगदत: शृणु

ब्राह्मण बोले—वृष्णिनन्दन श्रीकृष्ण! काश्यप के इस प्रकार पूछने पर सिद्ध महात्मा ने उन प्रश्नों का क्रमशः उत्तर देना आरम्भ किया। मैं वही कहता हूँ—सुनिए।

ब्राह्मण उवाच