Dehānta (Cyavana) and Upapatti: Kāśyapa’s Questions and the Siddha’s Account of Death, Pain, and Karmic Re-embodiment
ब्राह्मणा ज्ञानसम्पन्ना यथावच्छुतनिश्चया: । इतरं कृतपुण्यं वा तं विजानन्ति लक्षणै:
वेद-शास्त्रों के सिद्धान्तों का यथावत् अध्ययन कर ज्ञानसम्पन्न हुए ब्राह्मण लक्षणों के द्वारा जान लेते हैं कि कौन जीव पुण्यकृत है और कौन अन्यथा (पापकृत) है।
सिद्ध उवाच