Arjuna’s request to Krishna and the opening of the Kāśyapa–Brāhmaṇa mokṣa discourse (Āśvamedhika-parva 16)
प्रीतो5स्मि ते महाप्राज्ञ ब्रूहि किं करवाणि ते । यदीप्सुरुपपन्नस्त्वं तस्य कालोडयमागत:
हे महाप्राज्ञ! मैं तुमसे अत्यन्त प्रसन्न हूँ। बताओ, तुम्हारा कौन-सा प्रिय कार्य करूँ? जिस वस्तु की प्राप्ति की इच्छा से तुम मेरे पास आए हो, उसके मिलने का यही समय आ पहुँचा है।
सिद्ध उवाच