छत्रोपानहदानफलप्रशंसा — Praise of the Merit of Donating Umbrella and Footwear
शास्त्राणि दानानि तथा संयोगा वित्तसंचया: । अन्नतः सम्प्रवर्तन्ते तथा त्वं वेत्थ भार्गव
शास्त्रों का अध्ययन, दान, संयोग तथा धन-संचय—ये सब अन्न से ही प्रवर्तित होते हैं; हे भार्गव, यह बात तुम भी जानते हो।
भीष्म उवाच