Chatra–Upānah Dāna: Origin Narrative
Jamadagni–Reṇukā–Sūrya Saṃvāda
शिबिरुवाच अनाहितान्निग्नियतां यज्ञे विध्नं करोतु च । तपस्विभिर्विरुध्येच्च यस्ते हरति पुष्करम्
शिबि ने कहा—जिसने आपका कमल चुरा लिया हो, वह अग्निहोत्र किए बिना ही नष्ट हो; यज्ञ में विघ्न डाले और तपस्वियों से विरोध करे—अर्थात् इन पापों के फल का भागी बने।
शुक्र उवाच