Puṣkara-Śapatha Itihāsa (Agastya–Indra Dispute at the Tīrthas) | पुष्कर-शपथ-आख्यानम्
कश्यप उवाच सर्वत्र सर्व लपतु न्यासलोपं करोतु च । कूटसाक्षित्वमभ्येतु बिसस्तैन्यं करोति यः:
कश्यप बोले—“जो सर्वत्र सब कुछ हड़प ले, जो न्यास (अमानत) का अपहरण करे, और जो कूट-साक्षी बने—वह मृणाल-चोरी का पाप करता है।”
कश्यप उवाच