Puṣkara-Śapatha Itihāsa (Agastya–Indra Dispute at the Tīrthas) | पुष्कर-शपथ-आख्यानम्
शुन:सख उवाच सकृदुक्त मया नाम न गृहीतं त्वया यदि । तस्मात् त्रिदण्डाभिहता गच्छ भस्मेति मा जिरम्
शुनःसख ने कहा—मैंने एक बार अपना नाम कह दिया; यदि तूने उसे ग्रहण नहीं किया, तो इस प्रमाद के कारण मेरे त्रिदण्ड की मार खाकर अभी भस्म हो जा—विलम्ब न कर।
शुन:सख उवाच