प्रतिग्रहभेदः — The Distinction between Giving and Accepting
Vṛṣādarbhī–Saptarṣi Dialogue
अथ कृत्वोपहार्याणि चतुर्दश्यां महामति: । तमेव गणयन् शोक विरात्रे प्रत्यबुध्यत
फिर महामति निमि ने चतुर्दशी के दिन श्राद्ध में देने योग्य सब वस्तुएँ एकत्र कीं। पुत्र-शोक में उसी का चिन्तन करते-करते रात बीत जाने पर (अमावस्या के श्राद्ध हेतु) प्रातःकाल जाग उठे।
भीष्म उवाच