प्रतिग्रहभेदः — The Distinction between Giving and Accepting
Vṛṣādarbhī–Saptarṣi Dialogue
विश्वे चाग्निमुखा देवा: संख्याता: पूर्वमेव ते । तेषां नामानि वक्ष्यामि भागाहाणां महात्मनाम्
viśve cāgnimukhā devāḥ saṅkhyātāḥ pūrvam eva te | teṣāṃ nāmāni vakṣyāmi bhāgahāṇāṃ mahātmanām ||
भीष्म ने कहा—विश्वेदेवों का वर्णन तो मैं पहले ही कर चुका हूँ; उन सबका मुख अग्नि है, क्योंकि उसी के द्वारा वे हवि ग्रहण करते हैं। अब यज्ञ में अपने-अपने भाग के अधिकारी उन महात्माओं के नाम मैं बताता हूँ।
भीष्म उवाच