अनुशासनपर्व अध्याय ९३ — तपस्, सदोपवास, विघसाशन, अतिथिप्रियता
Austerity, regulated fasting, residual-eating, and hospitality
अथर्वशिरसो ध्येता ब्रह्मचारी यतव्रत: । सत्यवादी धर्मशील: स्वकर्मनिरतश्न॒ सः
atharvaśiraso dhyetā brahmacārī yatavrataḥ | satyavādī dharmaśīlaḥ svakarmanirataś ca saḥ |
भीष्म ने कहा—जो अथर्वशिर का ध्यान करने वाला, ब्रह्मचारी, नियमपूर्वक व्रत का पालन करने वाला, सत्यवादी, धर्मशील और अपने स्वकर्म में निरत है—वह पुरुष पंक्ति-पावन है।
भीष्म उवाच