अनुशासनपर्व अध्याय ९३ — तपस्, सदोपवास, विघसाशन, अतिथिप्रियता
Austerity, regulated fasting, residual-eating, and hospitality
भरतश्रेष्ठस अब जिनका वर्णन किया जा रहा है, इन सबको पंक्तिपावन जानना चाहिये। इनका वर्णन इसलिये करूँगा कि तुम ब्राह्मणोंकी श्राद्धमें परीक्षा कर सको ।।
bhīṣma uvāca | vidyāvedavratāsnātā brāhmaṇāḥ sarva eva hi | sadācāraparāś caiva vijñeyāḥ sarvapāvanāḥ ||
भीष्म ने कहा—जो ब्राह्मण विद्या तथा वेदव्रत में स्नातक हों और सदाचार में तत्पर हों, वे सब प्रकार से पवित्र करने वाले जानने चाहिए; मैं यह इसलिए कहता हूँ कि श्राद्ध में तुम योग्य ब्राह्मणों की परीक्षा कर सको।
भीष्म उवाच