नक्षत्रेषु श्राद्धफलविधानम् (Śrāddha Outcomes According to Nakṣatras)
अभवत् कार्तिकेय: स त्रैलोक्ये सचराचरे । स्कन्नत्वात् स्कन्दतां प्राप्तो गुहावासाद् गुहो&5भवत्
वह समस्त त्रैलोक्य में, चराचर प्राणियों सहित, ‘कार्तिकेय’ नाम से प्रसिद्ध हुआ। स्कन्दन (स्खलन) के कारण वह ‘स्कन्द’ कहलाया और गुहा में वास करने से ‘गुह’ नाम से विख्यात हुआ।
भीष्म उवाच