Śrāddha-Kalpa: Pitṛ-Pūjā and Tithi-Phala (श्राद्धकल्पः पितृपूजा च तिथिफलम्)
आजहार क्रतु वीरो ब्रद्मक्षत्रेण पूजितम् । वाजिमेधं महाराज सर्वकामसमन्वितम्
हे महाराज! उस वीर ने ब्राह्मणों और क्षत्रियों द्वारा पूजित, समस्त कामनाओं से युक्त अश्वमेध यज्ञ का अनुष्ठान किया।
भीष्म उवाच