Chapter 84: Brahmā’s Counsel on Tāraka, the Search for Agni, and the Genesis of Skanda
Kārttikeya
गवां मध्ये शुचिर्भूत्वा गोमतीं मनसा जपेत् । पुताभिरद्धिराचम्य शुचिर्भवति निर्मल:
पवित्र जल से आचमन करके शुद्ध होकर, गौओं के बीच में मन-ही-मन गोमती-मन्त्र का जप करे। ऐसा करने से वह अत्यन्त शुद्ध और निर्मल (पापमुक्त) हो जाता है।
व्यास उवाच