Go-mahātmyam: Pavitrāṇāṃ Pavitraṃ
Cows and Ghee as Supreme Purifiers
प्रजातान्येव भूतानि प्राक्रोशन् वृत्तिकांक्षया । वृत्तिदं चान्वपद्यन्त तृषिता: पितृमातृवत्
समस्त प्राणी उत्पन्न होते ही जीविका के लिये कोलाहल करने लगे। जैसे भूखे-प्यासे बालक अपने माँ-बाप के पास जाते हैं, उसी प्रकार समस्त जीव जीविकादाता के पास जा पहुँचे।
भीष्म उवाच