Brāhmaṇa-vandana: Criteria for Veneration, Disciplined Speech, and Protective Kingship (अनुशासनपर्व, अध्याय ८)
भीष्म उवाच स्पृहयामि द्विजातिभ्यो येषां ब्रह्म परं धनम् । येषां स्वप्रत्यय: स्वर्गस्तप: स्वाध्यायसाधनम्
भीष्म ने कहा—युधिष्ठिर! मैं उन द्विजों की अभिलाषा करता हूँ जिनके लिए ब्रह्म (वेद) ही परम धन है; जिनके लिए आत्म-प्रत्यय ही स्वर्ग है; और जिनका श्रेष्ठ तप वेदों का स्वाध्याय ही है।
भीष्म उवाच