Phala of Vrata, Niyama, Svādhyāya, Dama, Satya, Brahmacarya, and Service (व्रत-नियम-स्वाध्याय-दम-सत्य-ब्रह्मचर्य-शुश्रूषा-फलप्रश्नः)
तथा स पित्राभिहतो वाग्वज्रेण कृताञज्जलि: । प्रसीदेति ब्रुवन्नेव गतसत्त्वोडपतद् भुवि
tathā sa pitrābhihato vāgvajreṇa kṛtāñjaliḥ | prasīdeti bruvann eva gatasattvo ’patad bhuvi ||
पिता के वाग्वज्र से आहत होकर उसने हाथ जोड़कर कहा— “प्रभो! प्रसन्न होइए।” इतना कहते-कहते ही उसकी प्राणशक्ति क्षीण हो गई और वह पृथ्वी पर गिर पड़ा।
भीष्म उवाच