Phala of Vrata, Niyama, Svādhyāya, Dama, Satya, Brahmacarya, and Service (व्रत-नियम-स्वाध्याय-दम-सत्य-ब्रह्मचर्य-शुश्रूषा-फलप्रश्नः)
इत्युक्तोडहं धर्मराजं द्विजर्षे धर्मात्मानं शिरसाभिप्रणम्य । अनुज्ञातस्तेन वैवस्वतेन प्रत्यागमं भगवत्पादमूलम्
द्विजर्षे! धर्मराज के ऐसा कहने पर मैंने उन धर्मात्मा देवता को मस्तक झुकाकर प्रणाम किया; और वैवस्वत यम की आज्ञा पाकर मैं आपके भगवत् चरणों के समीप लौट आया।
नाचिकेत उवाच