Tilā-Dāna, Dīpa-Dāna, and Nitya-Jalapradāna
Yama–Brāhmaṇa Saṃvāda) | तिलदान-दीपदान-नित्यजलप्रदान (यम-ब्राह्मण संवाद
हस्ते हस्तिरथं दत्त्वा चतुर्युक्तमुपोषित: । प्राप्रोति परमॉललोकान् पुण्यकामसमन्वितान्
हस्त नक्षत्र में उपवास करके जो मनुष्य ध्वजा, पताका, चँदोवा और किंकिणीजाल—इन चारों से युक्त हाथी-जुते रथ का दान करता है, वह पवित्र कामनाओं से युक्त उत्तम लोकों को प्राप्त होता है।
नारद उवाच