Pānīya-dāna and Anna-dāna: The Primacy of Life-Sustaining Gifts (पानीयदान-प्रशंसा / अन्नदान-प्रशंसा)
तारासंस्थानि रूपाणि नानास्तम्भान्वितानि च । चन्द्रमण्डलशुभ्राणि किंकिणीजालवन्ति च
उन गृहों की आकृति तारों के समान उज्ज्वल और अनेक खम्भों से युक्त होती है। वे गृह चन्द्रमण्डल के समान श्वेत-उज्ज्वल प्रतीत होते हैं और उन पर छोटी-छोटी घंटियों की झालरें लगी रहती हैं।
भीष्म उवाच