Adhyāya 60: Dāna vs. Yajña—Royal Giving, Protection, and Karmic Share
पुष्पोपगं वाथ फलोपगं वा यः पादपं स्पर्शयते द्विजाय । सश्रीकमृद्ध॑ बहुरत्नपूर्ण लभत्ययत्नोपगतं गृहं वै
जो मनुष्य ब्राह्मण को फूलों या फलों से युक्त वृक्ष का दान करता है, वह अनायास ही धन-सम्पन्न, समृद्ध और अनेक रत्नों से परिपूर्ण घर प्राप्त करता है।
वैशम्पायन उवाच