Adhyāya 57: Tapas–Dāna Phala
On the Fruits of Austerity and Giving
रम्यान् पद्मोत्यलधरान् सर्वर्तुकुसुमांस्तथा । विमानप्रतिमांश्वापि प्रासादान् शैलसंनिभान्
कहीं कमल और उत्पल से भरे रमणीय सरोवर शोभा पाते थे; कहीं पर्वत-सदृश ऊँचे-ऊँचे महल दिखते थे, जो विमान के आकार में बने थे। वहाँ सब ऋतुओं के फूल खिले रहते थे।
भीष्म उवाच