Adhyāya 57: Tapas–Dāna Phala
On the Fruits of Austerity and Giving
ब्राह्माण्यस्य प्रभावाद्धि रथे युक्तौ स्वधुर्यवत् । इत्येवं चिन्तयान: स विदितश्न्यवनस्य वै
ब्राह्मणत्व के प्रभाव से ही महर्षि ने हम दोनों को अपने वाहनों की भाँति रथ में जोत दिया था— ऐसा राजा मन-ही-मन विचार कर ही रहा था कि महर्षि च्यवन को उसके आगमन का पता चल गया।
भीष्म उवाच