Adhyāya 57: Tapas–Dāna Phala
On the Fruits of Austerity and Giving
समन््ततः प्रमुदितान् ददर्श सुमनोहरान् । राजाने देखा
राजा ने चारों ओर अत्यन्त प्रसन्न और मनोहर दृश्य देखा। मनुष्यों की-सी वाणी बोलने वाले तोते और सारिकाएँ चहक रही थीं। भृंगराज, कोयल, शतपत्र, कोयष्टि, कुक्कुभ, मोर, मुर्गे, दात्यूह, जीवजीवक, चकोर, वानर, हंस, सारस और चक्रवाक आदि मनोहर पशु-पक्षी चारों ओर आनन्दपूर्वक विचर रहे थे।
भीष्म उवाच