अध्याय ५६ — च्यवन–कुशिकसंवादः
Cyavana–Kuśika Dialogue on Lineage, Conflict, and Transmission
उन्ड्शश्नाब्रुवन् सर्वे पश्यध्वं तपसो बलम् | क्रुद्धा अपि मुनिश्रेष्ठ॑ वीक्षितुं नेह शकनुम:
तब सब लोग अलग-अलग खड़े होकर कहने लगे—“देखो, तपस्या का बल कैसा है! हम क्रोध से भरे हुए हैं, फिर भी यहाँ मुनिश्रेष्ठ की ओर आँख उठाकर देख तक नहीं सकते।”
भीष्म उवाच