अध्याय ५६ — च्यवन–कुशिकसंवादः
Cyavana–Kuśika Dialogue on Lineage, Conflict, and Transmission
नोत्सार्या: पथिका: केचित् तेभ्यो दास््ये वसु हाहम् । ब्राह्मणेभ्यश्न ये कामानर्थयिष्यन्ति मां पथि
“मार्ग से किसी पथिक को हटाना नहीं चाहिए; मैं उन्हें धन दूँगा। और मार्ग में जो ब्राह्मण मुझसे जो-जो वस्तु माँगेंगे, मैं उन्हें वही प्रदान करूँगा।”
भीष्म उवाच