Cyavana’s Yogic Display and Kuśika’s Recognition of Tapas (च्यवन-योगप्रभावः कुशिकस्य तपःप्रशंसा च)
भीष्म उवाच ततस्तस्य प्रभावात् ते महर्षेर्भावितात्मन: । निषादास्तेन वाक्येन सह मत्स्यैर्दिवं ययु:
भीष्मजी कहते हैं—भारत! तत्पश्चात् विशुद्ध अंतःकरण वाले महर्षि च्यवन के ऐसा कहते ही, उनके प्रभाव से वे निषाद (मल्लाह) उन मछलियों के साथ स्वर्गलोक को चले गए।
भीष्म उवाच