Cavana’s Tests of Kuśika and the Queen (अध्याय ५३: च्यवन–कुशिक-परिक्षा)
निषादा ऊचु. अज्ञानाद् यत् कृतं पापं प्रसाद तत्र नः कुरु । करवाम प्रियं कि ते तन्नो ब्रूहि महामुने
निषाद बोले—महामुने! अज्ञानवश हमने जो पाप किया है, उसमें हमें क्षमा करके हम पर प्रसन्न हों। और बताइए, हम आपका कौन-सा प्रिय कार्य करें?
भीष्म उवाच