Dāyavibhāga (Inheritance Apportionment) and Household Precedence — Dialogue of Yudhiṣṭhira and Bhīṣma
नानिष्टाय प्रदातव्या कन्या इत्यूषिचोदितम् | तन्मूलं काममूलस्य प्रजनस्येति मे मति:
ऋषियों ने कहा है कि अयोग्य वर को कन्या नहीं देनी चाहिए; क्योंकि योग्य पुरुष को कन्यादान करना ही काम-सुख का आधार और सुयोग्य संतान-प्राप्ति का कारण है—ऐसा मेरा मत है।
भीष्य उवाच