Devaśarmā–Vipula Dialogue on Ahorātra–Ṛtu as Moral Witnesses (अनुशासन पर्व, अध्याय ४३)
(द्विजानां च गुरूणां च महागुरुनूपादिनाम् । क्षणात् स्त्रीसड्गभकामोत्था यातनाहो निरन्तरा ।।
धर्मशास्त्र में यह व्यवस्था है कि स्त्रियों के लिए वैदिक कर्मों का विधान नहीं है। प्रजापति ने स्त्रियों को दुर्वचन-स्वभाव तथा रति भी प्रदान की।
भीष्म उवाच