Vipula’s Yogic Protection of the Guru’s Household (विपुलस्य योगरक्षा / Vipulasya Yogarakṣā)
पड्गुष्वथ च देवर्षे ये चान्ये कुत्सिता नरा: । स्त्रीणामगम्यो लोके5स्मिन् नास्ति कश्चिन्महामुने
महामुने देवर्षे! जो पंगु हैं अथवा जो अन्य अत्यन्त घृणित पुरुष हैं, उनमें भी स्त्रियों की आसक्ति हो जाती है। इस लोक में स्त्रियों के लिए कोई भी पुरुष अगम्य नहीं है।
भीष्म उवाच