Vipula’s Yogic Protection of the Guru’s Household (विपुलस्य योगरक्षा / Vipulasya Yogarakṣā)
अनर्थित्वान्मनुष्याणां भयात् परिजनस्य च । मर्यादायाममर्यादा: स्त्रियस्तिष्ठन्ति भर्तृषु
स्त्रियों में स्वयं मर्यादा का ध्यान नहीं रहता; जब उन्हें चाहनेवाला पुरुष न मिले, परिजनों का भय बना रहे और पति पास हों—तभी वे मर्यादा के भीतर रह पाती हैं।
भीष्म उवाच