Viśvāmitra-janma: Ṛcīka–Satyavatī–Gādhi and the Charu Exchange (विश्वामित्र-जन्म: ऋचीक–सत्यवती–गाधि वृत्तान्तः)
त्रैलोक्यविख्यातगुएणं त्वं विप्रं जनयिष्यसि । साच क्षत्रं विशिष्ट वै तत एतत् कृतं मया
“मैंने यही सोचा था कि तुम त्रैलोक्य में विख्यात गुणों वाले ब्राह्मण को जन्म दोगी, और तुम्हारी माता एक विशिष्ट क्षत्रिय की जननी होगी; इसी हेतु मैंने यह विधान किया था।”
भीष्म उवाच