Viśvāmitra-janma: Ṛcīka–Satyavatī–Gādhi and the Charu Exchange (विश्वामित्र-जन्म: ऋचीक–सत्यवती–गाधि वृत्तान्तः)
गाधिरुवाच चन्द्ररश्मिप्रकाशानां हयानां वातरंहसाम् | एकतः: श्यामकर्णानां सहस्रं देहि भार्गव
गाधि ने कहा—भृगुनन्दन! शुल्करूप में आप मुझे एक हजार ऐसे घोड़े दीजिए जो चन्द्रमा की किरणों के समान प्रकाशमान, वायु के समान वेगवान हों और जिनका एक-एक कान श्याम रंग का हो।
ऋचीक उवाच