स्त्रीस्वभावप्रश्नः — Nārada and Pañcacūḍā on Strī-svabhāva
Anuśāsana-parva 38
श्रद्धया परया युक्ता हानभिद्रोहलब्धया । दमस्वाध्यायनिरता: सर्वान् कामानवाप्स्यथ
हे द्विजगण! यदि तुम सब किसी भी प्राणी के प्रति द्रोह न करने से प्राप्त परम श्रद्धा से युक्त होकर इन्द्रिय-दम और स्वाध्याय में निरत रहोगे, तो समस्त कामनाओं को प्राप्त करोगे।
भीष्म उवाच