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Shloka 21

पात्रलक्षण-परिक्षा (Pātra-Lakṣaṇa Parīkṣā) — Criteria for a Worthy Recipient

वायुदेव उवाच मातरं सर्वभूतानां पृच्छे त्वां संशयं शुभे । केनस्वित्‌ कर्मणा पाप॑ व्यपोहति नरो गृही

वायुदेव बोले—शुभे! तुम समस्त प्राणियों की माता हो; इसलिए मैं तुमसे एक संदेह पूछता हूँ। गृहस्थ मनुष्य किस कर्म के अनुष्ठान से अपने पाप का नाश कर सकता है?

वायुदेव उवाच