Śakra–Śambara Saṃvāda: Brāhmaṇa-sevā, Anasūyā, and Vāg-bala (शक्रशम्बरसंवादः)
पौरजानपदांक्षापि ब्राह्मणांश्न बहुशुतान् । सान्त्वेन भोगदानेन नमस्कारैस्तथार्चयेत्
राजा वेदज्ञ ब्राह्मणों तथा बड़े-बूढ़ों का सदा ही आदर करे। नगर और जनपद में रहने वाले बहुश्रुत ब्राह्मणों को मधुर वचन बोलकर, उत्तम भोग प्रदान कर तथा सादर शीश झुकाकर सम्मानित करे।
भीष्म उवाच