Indra–Mataṅga Saṃvāda: On the rarity and responsibilities of Brāhmaṇya (इन्द्र-मतङ्ग संवादः)
ब्राह्मणे दारुणं नास्ति मैत्रो ब्राह्मण उच्यते । आचार्य: सर्वभूतानां शास्ता कि प्रहरिष्यति
ब्राह्मण में इतनी क्रूरता नहीं होती; ब्राह्मण सबके प्रति मैत्रीभाव रखने वाला कहा जाता है। जो समस्त प्राणियों को उपदेश देने वाला आचार्य है, वह भला किसी पर कैसे प्रहार करेगा?
भीष्म उवाच