मातङ्ग–शक्रसंवादः
Mataṅga–Śakra Dialogue on Tapas, Status, and Moral Qualities
तद्भावस्तद्गतमनास्तन्निष्ठस्तत्परायण: । गड्जां योडनुगतो भकक््त्या स तस्या: प्रियतां व्रजेत्
जो गंगाजी में श्रद्धा रखता है, उन्हीं में मन लगाता है, उन्हीं में निष्ठा रखता है, उन्हीं को परम आश्रय मानता है और भक्तिभाव से उनका अनुसरण करता है—वह भगवती भागीरथी का प्रिय पात्र बन जाता है।
सिद्ध उवाच