तीर्थवंशोपदेशः
Tīrtha-vaṃśa Upadeśa: Instruction on the Fruits of Sacred Waters
व्रतिनो नियमस्थाश्न ये विप्रा: श्रुतसम्मता: । तत्समाप्त्यर्थमिच्छन्ति तेभ्यो दत्त महाफलम्
भीष्म बोले—जो ब्राह्मण व्रत और नियम में स्थित होकर श्रुति-शास्त्र की सम्मति के अनुसार चलते हैं और अपने व्रत की समाप्ति के लिए धन चाहते हैं, उन्हें देने से महान् फल की प्राप्ति होती है।
भीष्म उवाच