तीर्थवंशोपदेशः
Tīrtha-vaṃśa Upadeśa: Instruction on the Fruits of Sacred Waters
अकल्कको हातर्कश्न ब्राह्मणो भरतर्षभ । संसर्गे भैक्ष्यवृत्तिश्न स राजन् केतनक्षम:
भरतश्रेष्ठ! जो ब्राह्मण दम्भरहित है, व्यर्थ तर्क-वितर्क नहीं करता और गृहस्थों से भिक्षा लेकर निर्वाह करनेवाला, संगति के योग्य है—वह, राजन्, निमन्त्रण पाने का अधिकारी है।
भीष्म उवाच